नमस्कार प्यारे किसान भाइयों,
जैसा कि आप जानते हैं हमारी फसल में पौधों के पूर्ण रूप से विकास के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है।
यदि फसल में पोषक तत्वों की कमी होती है तो कई तरह के रोग पौधों में लग जाते हैं, जिससे हमारी फसल खराब हो जाती है और हमें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है ।
आप सभी जानते होंगे कि पौधों के सही तरीके से विकास के लिए कई तरह के सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है उनमें से बोरोन भी एक प्रमुख सूक्ष्म तत्व है ।
यह पौधे की कोशिकाओं में घुलनशील रूप में पाया जाता है, और उनमें कोशिका झिल्ली को मजबूती प्रदान करता है ।
आपने जाइलम और फ्लोएम के बारे में सुना होगा जिनके कार्य पौधों में जल और भोजन को जड़ों से विभिन्न भागों तक पहुंचाना होता है।
पौधों में जल व खनिज लवणों को विभिन्न भागो तक पहुंचाने का कार्य बोरोन के द्वारा ही संभव होता है, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बोरोन कितना जरूरी है पौधों के लिए।
बाजार मे उपलब्धता--
आपको बाजार में कई कंपनियों का बोरोन मिल जाता है जिनमें iffco का बोरोन 14.5 % ( डाइसोडियम टेट्राबोरेट पेंटा हाइड्रेट के रूप में आता है ) बोरोन का एक अच्छा स्रोत हो सकता है ।
फसलों में बोरोन का प्रयोग कई तरीके से किया जाता है आप इसका प्रयोग पर्णिय छिड़काव, ड्रिप सिंचाई या खेत में बुवाई से पहले मिट्टी में मिला करके यूज कर सकते हैं ।
सबसे अच्छा होगा यदि हम soil टेस्ट करवा कर फिर निर्धारित मापदंडों के अनुसार बोरोंन का इस्तेमाल अपनी फसलों के लिए करें तो इससे हमें अधिक लाभ मिलेगा ।
आवश्यकता से अधिक बोरोन का इस्तेमाल भी हमारी फसलों के ऊपर जहरीला प्रभाव छोड़ता है , हमें ध्यान रखना चाहिए कि धान वाले फसलों में 2- 4 पीपीएम और दलहनी वाली फसलों में 26 -26 पीपीएम के हिसाब से ही बोरोन का प्रयोग करें।
बोरोन का प्रयोग करने से फसलों में होने वाले लाभ
जब हम उचित मात्रा में बोरोन का इस्तेमाल दलहनी फसलों में करते हैं तो वहां पर जड़ों में राईजोबियम की गाठो की संख्या अधिक बनती है जो कि वायुमंडलीय नाइट्रोजन का अधिक स्थरिकरण करती हैं ।
फलदार और सब्जी वाली फसलों में सूखा के प्रति पौधे अधिक सहनशील बनते हैं ।
आलू को फटने से बचाता है ,और साथ में आलू के छिलके को आकर्षक भी बनाता है जिससे हमें बाजार भाव अच्छा मिलता है ।
फूलगोभी में फूल को खोखला व भूरा रोग होने से बचाता है।
दलहन वाली फसलों में दाने अधिक बनते हैं फलियों में जिससे उपज में बढ़ोतरी होती है।
नींबू में फूल अधिक बनते हैं और साथ में झडते भी नहीं है ।
टमाटर में टमाटर का फल फटता नहीं है, और पौधे की लंबाई में भी सही वृद्धि होती है।
मक्का में भुट्टा दानों से पूर्ण तरीके से भर जाता है ।
मात्रा या डोज
भारी मिट्टी मे 4-6kg per acre
हल्की मिट्टी मे 2-4 kg per acre
फलदार पौधों मे 10-100gm प्रति पौधा (लंबाई के हिसाब से)
ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो देखे
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